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Chetna ka vigyan manovigyaan kaise bana चेतना का विज्ञान मनोविज्ञान कैसे बना?

Chetna ka vigyan manovigyaan kaise bana चेतना का विज्ञान मनोविज्ञान कैसे बना?

नमस्ते दोस्तो आप का स्वागत है हमारे इस ब्लॉग में चेतना के विज्ञान के बारे में पड़ने से पहले हमें मनोविज्ञान की उत्पत्ति कैसे हुई कहा हुई इसके द्वारा हुई यह जानना अवश्य है क्योंकि यह पोस्ट भाग3 हर टॉपिक को अलग अलग टोपिक वाईस पढ़ाया जा रहा है अगर आप इस पोस्ट में पहले आये है तो आप स निवेदन है भाग 1 और 2 पढ़े फिर यहाँ पर वापिस आये जिससे आप की मनोविज्ञान विषय मे रुचि और उत्साह बना रहे और टॉपिक समझने में आसानी हो ।

इसके आगे के पोस्ट पढ़ने के लिए यह क्लिक करे - 

क्लिक भाग 1 - 


मनोविज्ञान की उत्पत्ति - Origin of Psychology


क्लिक भाग 2 - 

Adhunik manovigyan history आधुनिक मनोविज्ञान के जनक


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विलियम जैम्स ने 1870 में विचार दिया था - चेतना ही जीवन है और जीवन ही चेतना हे इन के इसी विचार के आधार पर इसका नया अभिप्राय चेतना का विज्ञान बना ओर इस विचार का समर्थन - विलियम वुंट, जेम्स सलि, वॉइस, टिचनर, चैडविक आदि ने किया और ये सभी संरचनावादी कहलाए


नोट : जर्मनी के मनोवैज्ञानिक विलियम वूंट ने 1879 ई. में लिपजिंग नामक स्थान पर कार्ल मार्क्स विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की पहली प्रयोगशाला स्थगित की ओर प्रयोगात्मक मनोविज्ञान के जनक कहलाए ।

चेतना का विज्ञान अभिप्राय सबसे कम समय तक प्रचलित रहा और 19वी ई. आते आते मात्र 30 वर्षो में समाप्त हो गया इस के निम्न दो कारण थे।

इंग्लैंड के विद्वान विलयम मेकडुगल ने 1900ई. में अपनी पुस्तक “The out line psychology” में लिखा की चेतना एक बुरा शब्द है, और मनोविज्ञान का अर्थ चेतना के रूप में लगाना दुर्भाग्यपुर्ण है


1900 ई. में ही सिगमंड फ़ायर्ड ने मनुविशलेषण वाद का सिद्धांत और एक बर्फ के टुकड़े का उदाहरण देते हुए समझाने का प्रयास किया कि जिस प्रकार से बर्फ के टुकड़े को पानी में डालने पर उसका अधिकतर भाग पानी में डूब जाता है, और बहुत कम भाग बाहर नजर आता है ठीक उसी प्रकार से चेतना का स्वरूप तीन प्रकार का होता है जिसमें चेतना भाग केवल 10% और अर्दचेतन व अचेतन भाग 90% होता है।

इन दोनों कारणों से यह अभिप्राय समाप्त हो गया ।

नोट : वर्तमान मनोविज्ञान में अर्दचेतन अवचेतन का अध्ययन किया जाता है।

फ़ायर्ड के कार्यो की मनोविज्ञान के क्षेत्र में स्थापित करने का श्रेय फ़ायर्ड की पुत्री अन्ना फ़ायर्ड और इनके शिष्य जुंग को जाता है।

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