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Adhunik manovigyan history आधुनिक मनोविज्ञान के जनक

Adhunik manovigyan history  आधुनिक मनोविज्ञान के जनक
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Adhunik manovigyan history  मनोविज्ञान के जनक
नमस्ते दोस्तो आधुनिक मनोविज्ञान पढ़ने से पहले हमें मनोविज्ञान का इतिहास जानना चाहिये मनोविज्ञान कैसे बनी मनोविज्ञान का क्या महत्व रहा आत्मा के अध्ययन की शुरुआत कैसे हुई और मनोविज्ञान सम्बंधित क्या बाधाएं रहीं
इन को पढ़ने के लिए इस पोस्ट को अवश्य पड़े

Click - मनोविज्ञान की उत्पत्ति - Origin of Psychology

Adhunik manovigyan history  आधुनिक मनोविज्ञान के जनक

आत्मा का अध्ययन

यूनानी दार्शनिक “देकार्ते” (1596ई.-1650ई.) ने आत्मा के अध्ययन की विषय वस्तु को भौतिक शास्त्र में जोड़ने का प्रयास किया तब लोगो ने इसका विरोध किया विशेष कर -
हॉब्स, लॉक, कांट, स्पिनोज़ा वे प्रमुख दार्शनिक थे जिन्होंने कहा की आत्मा का अध्ययन भौतिक शास्त्र में सम्भव नही है और सवाल पैदा हो गए
आत्मा क्या है ?
आत्मा केसी है ?
आत्मा कहा है ?
और इन सवालों का जवाब नही मिलने के कारण यह अभिप्राय अमान्य हो गया

मन एवं मस्तिष्क का विज्ञान

17वी सदी में ईटली के दार्शनिक “पोम्पिनोजी” ने आत्मा के अध्ययन की विषय वस्तु को नया अभिप्राय दिया और मन/मस्तिष्क का विज्ञान बताया ।

पोम्पिनोजी के विचारों का समर्थन हॉब्स, लॉक, कांट, स्पिनोज़ा आदि विद्वानों के द्वारा किया गया।

19वी सदी आते आते यह अभिप्राय भी समाप्त होने लगा
इसके लिए कई प्रशन पैदा हुए जैसे -
मन व मस्तिष्क में क्या अंतर है ?
मन कितने होते है ?
कोनसे मन का अध्ययन किया जाता है ?
इत्यादि ।

आधुनिक मनोविज्ञान


1852 ई. की एक घटना से प्रभावित होकर अमेरिकी विद्वान “विलियम जेम्स” ने लगभग 18 वर्षो तक मेहनत की और 1870ई. में आते आते मनोविज्ञान की विषयवस्तु को दर्शनशास्त्र से अलग करते हुए आधुनिक मनोविज्ञान की रचना की इस प्रकार से 1870 में मनोविज्ञान स्वतंत्र विषय बना इसे “विलियम जेम्स” के द्वारा शुरू किया गया इसी कारण से विलियम जेम्स को आधुनिक मनोविज्ञान का जनक कहते हैं ।

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भाग 3 -


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